उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आ सकती है। लंबे समय से अपने मानदेय (Honorarium) में बढ़ोतरी की मांग कर रहे शिक्षामित्रों के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने सकारात्मक संकेत दिए हैं।
राज्य सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय को बढ़ाने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। हालांकि, कमेटी ने खुद मानदेय बढ़ाने का निर्णय लेने में असमर्थता जताई है और इसे मंत्री परिषद या सक्षम स्तर से निर्णय लेने के लिए कहा है।
शिक्षामित्र कौन हैं और उनका संघर्ष क्या है?
शिक्षामित्र उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अस्थायी शिक्षक हैं। इनकी नियुक्ति शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए की गई थी।
प्रदेश में करीब 1.46 लाख शिक्षामित्र कार्यरत हैं। 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इनके नियमितीकरण (Regularisation) के फैसले को रद्द कर दिया था।
इसके बाद से इन्हें नियमित शिक्षक का दर्जा न मिलकर मानदेय पर रखा गया है। यह मानदेय राशि बहुत कम होने के कारण शिक्षामित्र पिछले कई सालों से लगातार मानदेय वृद्धि की मांग कर रहे हैं।
वर्तमान में शिक्षामित्रों को ₹10,000 प्रति माह का मानदेय मिलता है।
शिक्षामित्रों के मानदेय में भारी बढ़ोतरी: जानें नया प्रस्तावित वेतन
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और सरकारी प्रस्तावों के अनुसार, शिक्षामित्रों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी का प्रस्ताव शासन के पास विचाराधीन है। यह बढ़ोतरी उनके वर्तमान मानदेय से कई गुना अधिक हो सकती है।
वित्त विभाग से मंजूरी मिलने के बाद, प्रस्ताव में शिक्षामित्रों का मानदेय ₹17,000 से ₹20,000 प्रति माह तक करने का सुझाव है। वहीं, अनुदेशकों का मानदेय ₹22,000 प्रति माह तक किए जाने की भी चर्चा है।
यह एक बड़ा वित्तीय फैसला होगा, जिसका अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्री परिषद ही करेगी।
मानदेय बढ़ोतरी के साथ ही, शिक्षामित्रों को हर 3 साल में वेतन वृद्धि (Salary Increment) का लाभ देने का प्रावधान भी विचाराधीन है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में स्थिरता आने की उम्मीद है।
शिक्षामित्र मानदेय का अवलोकन (Shikshamitra Honorarium Overview)
| विवरण (Details) | वर्तमान स्थिति (Current Status) | प्रस्तावित/चर्चा में (Proposed/Under Discussion) |
| वर्तमान मासिक मानदेय | ₹10,000 प्रति माह | ₹17,000 से ₹20,000 प्रति माह |
| अनुदेशकों का वर्तमान मानदेय | ₹9,000 प्रति माह | ₹20,000 से ₹22,000 प्रति माह |
| लाभार्थी संख्या | करीब 1.46 लाख शिक्षामित्र | 1.46 लाख शिक्षामित्र और 25,000 अनुदेशक |
| मानदेय वृद्धि का आधार | कमेटी की रिपोर्ट, हाई कोर्ट का आदेश | मंत्री परिषद का अंतिम निर्णय |
| अन्य लाभ | कैशलेस इलाज की सुविधा | हर 3 साल पर वेतन वृद्धि |
| मानदेय कब लागू होगा | अंतिम निर्णय कैबिनेट बैठक के बाद | जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी की उम्मीद |
मुख्यमंत्री का ऐलान और कमेटी की रिपोर्ट
शिक्षक दिवस (5 सितंबर 2025) के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों के मानदेय बढ़ाने के लिए सकारात्मक कदम उठाने की बात कही थी। उन्होंने घोषणा की थी कि मानदेय वृद्धि के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा।
इस कमेटी ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। कमेटी ने बताया कि मानदेय में इतनी बड़ी बढ़ोतरी का फैसला उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। इसलिए अब अंतिम फैसला उत्तर प्रदेश सरकार को लेना है।
शिक्षामित्र संगठनों ने कमेटी की रिपोर्ट के बाद कैबिनेट बैठक पर अपनी निगाहें जमा रखी हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार सरकार ठोस फैसला लेगी और उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करेगी।
मानदेय में बढ़ोतरी से शिक्षामित्रों को क्या राहत मिलेगी?
शिक्षामित्रों का वर्तमान मानदेय ₹10,000 प्रति माह है, जो आज की महंगाई के दौर में जीवन यापन के लिए अपर्याप्त माना जाता है।
मानदेय में प्रस्तावित ₹17,000 से ₹20,000 तक की बढ़ोतरी होने से उनकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आएगा। यह उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करेगा और वे अधिक समर्पण के साथ शिक्षण कार्य कर सकेंगे।
इसके अलावा, कैशलेस इलाज जैसी सुविधाओं का मिलना भी उनके लिए एक बड़ी राहत है।
प्रमुख बिंदु (Key Highlights)
- 1.46 लाख शिक्षामित्र और करीब 25,000 अनुदेशक मानदेय वृद्धि का इंतजार कर रहे हैं।
- वर्तमान में मानदेय ₹10,000 है, जिसे बढ़ाकर ₹20,000 तक करने का प्रस्ताव है।
- मानदेय बढ़ाने के लिए गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है।
- अब अंतिम निर्णय उत्तर प्रदेश कैबिनेट या मंत्री परिषद द्वारा लिया जाएगा।
- शिक्षामित्रों को हर 3 साल पर वेतन वृद्धि का लाभ भी मिल सकता है।

