DAP, TSP, SSP और NPK में क्या फर्क है? कौन-सी खाद सबसे असरदार है किसानों के लिए

खेती में अच्छी उपज और फसल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उर्वरकों (खाद) का सही इस्तेमाल बहुत ज़रूरी है। नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), और पोटाश (K) तीन मुख्य पोषक तत्व हैं जिनकी पौधों को सबसे अधिक ज़रूरत होती है। भारतीय किसान मुख्य रूप से DAP, TSP, SSP, और NPK जैसे रासायनिक उर्वरकों का उपयोग करते हैं।

हालांकि, इन सभी खादों में पोषक तत्वों की मात्रा और उनका फसलों पर असर अलग-अलग होता है। एक किसान के लिए यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है कि उसकी मिट्टी और फसल की ज़रूरत के हिसाब से कौन-सी खाद सबसे असरदार है। सही खाद का चुनाव न केवल उत्पादन बढ़ाता है, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य को भी बनाए रखने में मदद करता है, जिससे खेती अधिक लाभदायक बनती है।

गलत उर्वरक का प्रयोग करने से फसल को नुकसान हो सकता है और साथ ही किसानों का पैसा भी बर्बाद होता है। इसलिए, हर खाद की विशेषताओं और कमियों को समझना ज़रूरी है। यह लेख आपको इन चारों मुख्य उर्वरकों के बीच के अंतर को सरल हिंदी में समझाएगा और सही चुनाव में आपकी मदद करेगा।

डीएपी (DAP), टीएसपी (TSP), एसएसपी (SSP) और एनपीके (NPK) उर्वरकों का परिचय

ये सभी उर्वरक फॉस्फोरस पर आधारित हैं, लेकिन इनमें नाइट्रोजन, पोटाश और अन्य गौण पोषक तत्व (Secondary Nutrients) भी अलग-अलग मात्रा में पाए जाते हैं। हर खाद की अपनी विशिष्ट भूमिका होती है, जो पौधों के अलग-अलग विकास चरणों और मिट्टी की स्थिति को प्रभावित करती है। इन खादों को पौधों को तेज़ वृद्धि, मजबूत जड़ें, और बेहतर फूल और फल के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

इन उर्वरकों का सही उपयोग मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) के परिणामों पर निर्भर करता है, जिससे किसान यह जान पाते हैं कि उनकी मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है।

मुख्य उर्वरकों का तुलनात्मक अवलोकन (Overview of Main Fertilizers)

विशेषता DAP (डाई अमोनियम फॉस्फेट) TSP (ट्रिपल सुपर फॉस्फेट) SSP (सिंगल सुपर फॉस्फेट) NPK (मिश्रित उर्वरक)
मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन (N) और फॉस्फोरस (P) फॉस्फोरस (P) फॉस्फोरस (P) नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटाश (K)
पोषक तत्वों का अनुपात 18% N : 46% P₂O₅ लगभग 46% P₂O₅ लगभग 16% P₂O₅ विभिन्न अनुपात (जैसे: 12:32:16, 10:26:26)
अन्य तत्व कोई खास नहीं कोई खास नहीं सल्फर (Sulfur) और कैल्शियम (Calcium) अनुपात के अनुसार भिन्न
उपयोगिता बुवाई के समय शुरुआती बढ़त और जड़ों के विकास के लिए जिन मिट्टी में सिर्फ फॉस्फोरस की उच्च कमी हो सल्फर और कैल्शियम की कमी वाली मिट्टी के लिए सर्वोत्तम संतुलित पोषण और संपूर्ण फसल चक्र के लिए
घुलनशीलता पानी में उच्च घुलनशील तेजी से घुलनशील अन्य की तुलना में कम घुलनशील, मिट्टी में धीरे-धीरे मिलता है उच्च घुलनशील (NPK प्रकार पर निर्भर)
मिट्टी पर असर हल्का अम्लीय (Acidic) प्रभाव डालता है न्यूनतम प्रभाव कैल्शियम और सल्फर के कारण फायदेमंद हो सकता है अनुपात के अनुसार भिन्न
लागत आमतौर पर अन्य फॉस्फोरस खादों से अधिक महंगा मध्यम सबसे सस्ता और पुराना उर्वरक अनुपात और तत्वों की मात्रा के आधार पर भिन्न

DAP, TSP, SSP और NPK में मुख्य अंतर

इन चारों खादों में सबसे बड़ा अंतर उनमें मौजूद पोषक तत्वों की संरचना का होता है।

DAP (डाई अमोनियम फॉस्फेट)

डीएपी भारत में सबसे लोकप्रिय फॉस्फोरस उर्वरक है। इसमें 18% नाइट्रोजन (N) और 46% फॉस्फोरस ($P_2O_5$ के रूप में) होता है।

  • यह फसलों को शुरुआती विकास के चरण में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस दोनों एक साथ प्रदान करता है।
  • जड़ों के तेज़ी से विकास में मदद करता है और पौधे को शुरुआती मजबूती देता है।
  • यह पानी में उच्च घुलनशील है, जिससे पोषक तत्व तुरंत पौधों को उपलब्ध हो जाते हैं।
  • लेकिन, यह मिट्टी पर हल्का अम्लीय प्रभाव डालता है, इसलिए अम्लीय मिट्टी में इसका उपयोग कम करना चाहिए। इसमें सल्फर और कैल्शियम नहीं होता है।

TSP (ट्रिपल सुपर फॉस्फेट)

टीएसपी एक उच्च फॉस्फोरस सांद्रता वाला उर्वरक है, जिसमें लगभग 46% फॉस्फोरस ($P_2O_5$ के रूप में) होता है, लेकिन नाइट्रोजन बिल्कुल नहीं होता है।

  • यह उन क्षेत्रों के लिए सबसे अच्छा है जहाँ मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी नहीं है, या जहाँ केवल फॉस्फोरस की ज़रूरत है।
  • इसे आमतौर पर यूरिया (नाइट्रोजन के लिए) के साथ मिलाकर उपयोग किया जाता है, जिससे यह डीएपी की तरह प्रभावी बन जाता है।
  • इसका उपयोग उन फसलों के लिए अच्छा है जिन्हें फूल और फल बनने के चरण में उच्च फॉस्फोरस की आवश्यकता होती है।

SSP (सिंगल सुपर फॉस्फेट)

एसएसपी एक पुरानी और सबसे सस्ती फॉस्फोरस खाद है, जिसमें लगभग 16% फॉस्फोरस ($P_2O_5$ के रूप में) होता है।

  • फॉस्फोरस के साथ-साथ इसमें सल्फर (गंधक) और कैल्शियम भी होता है, जो तिलहनी (जैसे सरसों) और दलहनी (जैसे चना, दाल) फसलों के लिए बहुत ज़रूरी हैं।
  • यह सल्फर की कमी वाली मिट्टी के लिए सबसे ताकतवर खाद साबित हो सकता है।
  • यह मिट्टी की संरचना सुधारने में मदद करता है क्योंकि इसमें कैल्शियम होता है।
  • यह अन्य फॉस्फोरस खादों की तुलना में कम घुलनशील होता है, इसलिए इसे बुवाई के समय खेत में डालना बेहतर होता है ताकि इसे घुलने का पर्याप्त समय मिल सके।

NPK (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम)

एनपीके एक मिश्रित या जटिल उर्वरक है, जिसमें नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), और पोटाश (K) तीनों मुख्य तत्व एक संतुलित अनुपात में मौजूद होते हैं (जैसे: 12:32:16, 10:26:26)।

  • यह पौधे को संपूर्ण पोषण प्रदान करता है, जिससे अलग से पोटाश डालने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
  • पोटाश होने के कारण यह फसल में चमक लाता है, तने को मज़बूत करता है, और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
  • यह सभी प्रकार की फसलों के लिए उपयुक्त है, खासकर उन फसलों के लिए जिन्हें पोटाश की अधिक आवश्यकता होती है (जैसे आलू)।
  • यह पानी में पूरी तरह घुलनशील होता है और इसका इस्तेमाल डीएपी के विकल्प के तौर पर किया जाता है।

कौन-सी खाद किसानों के लिए सबसे असरदार है?

‘सबसे असरदार’ खाद का चुनाव मिट्टी के प्रकार, फसल की ज़रूरत और पोषक तत्वों की कमी पर निर्भर करता है। किसी एक खाद को सर्वश्रेष्ठ नहीं कहा जा सकता।

  • सर्वोत्तम चुनाव के लिए मिट्टी परीक्षण: विशेषज्ञों का मानना है कि खाद डालने से पहले मिट्टी परीक्षण कराना सबसे ज़रूरी है। मिट्टी की जांच से पता चलता है कि कौन-सा पोषक तत्व कम है, और उसी हिसाब से खाद का प्रयोग करना चाहिए।
  • DAP (डीएपी) – शुरुआती बढ़त के लिए: अगर फसल को बुवाई के समय नाइट्रोजन और फॉस्फोरस दोनों की तुरंत ज़रूरत है (जैसे शुरुआती विकास के लिए), तो डीएपी सबसे असरदार है। यह तेज़ बढ़त देता है।
  • SSP (एसएसपी) – सल्फर की कमी के लिए: यदि आपकी मिट्टी में सल्फर या कैल्शियम की कमी है, या आप तिलहनी/दलहनी फसल उगा रहे हैं, तो एसएसपी सबसे असरदार और किफायती विकल्प है, क्योंकि यह एक साथ तीन ज़रूरी पोषक तत्व देता है।
  • NPK (एनपीके) – संतुलित पोषण के लिए: अगर फसल को संतुलित पोषण की ज़रूरत है, या आपकी मिट्टी में पोटाश की कमी है, तो एनपीके मिश्रित खाद (जैसे NPK 12:32:16) डीएपी से बेहतर मानी जाती है, क्योंकि यह नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश तीनों देता है। आलू जैसी फसलों के लिए यह विशेष रूप से उपयोगी है।
  • TSP (टीएसपी) – फॉस्फोरस की उच्च खुराक के लिए: अगर मिट्टी में फॉस्फोरस की बहुत ज़्यादा कमी है और नाइट्रोजन की पर्याप्त मात्रा पहले से मौजूद है, तो टीएसपी को प्राथमिकता दी जा सकती है। इसे यूरिया के साथ मिलाकर डीएपी जैसा प्रभाव प्राप्त किया जा सकता है।

प्रमुख फसलों के लिए खाद का चुनाव

  • गेहूं और मक्का (अनाज वाली फसलें): बुवाई के समय DAP या NPK (12:32:16) का प्रयोग आमतौर पर किया जाता है।
  • सरसों और मूंगफली (तिलहनी फसलें): SSP (सल्फर के कारण) और NPK का मिश्रण सबसे अच्छा माना जाता है।
  • दालें (दलहनी फसलें): SSP और TSP का प्रयोग फॉस्फोरस की ज़रूरत पूरी करने के लिए किया जाता है।
  • आलू और गन्ना: NPK (पोटाश की उच्च आवश्यकता के कारण) विशेष रूप से फायदेमंद होता है।

सही खाद का चुनाव एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक कृषि का एक हिस्सा है। किसानों को केवल ब्रांड या लोकप्रियता के आधार पर नहीं, बल्कि फसल की आवश्यकता और मिट्टी की रिपोर्ट के आधार पर खाद का चुनाव करना चाहिए। संतुलित मात्रा में और सही समय पर खाद का प्रयोग करना ही सफलता की कुंजी है।

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